TDS (Tax Deducted at Source) यानी स्रोत पर कर कटौती भारत में आयकर अधिनियम, 1961 के तहत एक कर संग्रह प्रणाली है। इसमें भुगतान करते समय ही कर की एक निश्चित राशि काट ली जाती है और इसे सरकार को जमा कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि कर का भुगतान समय पर हो और कर चोरी को रोका जा सके।
TDS कब लागू होता है?
TDS विभिन्न प्रकार के भुगतानों पर लागू होता है, जैसे:
- वेतन (Salary): नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के वेतन से TDS काटा जाता है।
- ब्याज (Interest): बैंक जमा, डिबेंचर, या ऋण पर ब्याज पर TDS काटा जाता है।
- कमीशन (Commission): एजेंट या ब्रोकर को दिए गए कमीशन पर TDS लागू होता है।
- किराया (Rent): संपत्ति के किराए पर TDS काटा जाता है।
- पेशेवर शुल्क (Professional Fees): डॉक्टर, वकील, इंजीनियर आदि को दिए गए पेशेवर शुल्क पर TDS लागू होता है।
- लॉटरी या पुरस्कार (Lottery or Prize Money): लॉटरी या पुरस्कार राशि पर TDS काटा जाता है।
TDS की दरें
TDS की दरें भुगतान के प्रकार और प्राप्तकर्ता की श्रेणी (व्यक्ति, कंपनी, NRI आदि) पर निर्भर करती हैं। उदाहरण के लिए:
- वेतन: आयकर स्लैब के अनुसार TDS काटा जाता है।
- ब्याज: सामान्यतः 10% TDS काटा जाता है।
- किराया: 10% TDS काटा जाता है।
TDS कटौती के नियम
- TDS कटौती की सीमा: कुछ मामलों में, भुगतान एक निश्चित सीमा से अधिक होने पर ही TDS काटा जाता है। उदाहरण के लिए, बैंक ब्याज पर TDS तभी काटा जाता है जब ब्याज ₹40,000 (सामान्य व्यक्ति) या ₹50,000 (वरिष्ठ नागरिक) से अधिक हो।
- PAN जरूरी: TDS कटौती और रिटर्न दाखिल करने के लिए PAN (Permanent Account Number) अनिवार्य है।
- TDS रिटर्न: TDS काटने वाले व्यक्ति/कंपनी को नियमित रूप से TDS रिटर्न दाखिल करना होता है।
TDS प्रमाणपत्र (Form 16/16A)
- Form 16: वेतनभोगी कर्मचारियों को नियोक्ता द्वारा जारी किया जाता है, जिसमें TDS विवरण होता है।
- Form 16A: गैर-वेतन आय (जैसे ब्याज, किराया आदि) पर TDS का विवरण दर्शाता है।
TDS रिफंड
यदि आपका TDS आपकी वास्तविक कर दायित्व से अधिक काटा गया है, तो आप आयकर रिटर्न दाखिल करके रिफंड का दावा कर सकते हैं।
नोट
- TDS काटने वाले व्यक्ति/कंपनी को TDS जमा करने और रिटर्न दाखिल करने की जिम्मेदारी होती है।
- TDS का उद्देश्य कर संग्रह को सुव्यवस्थित करना और कर चोरी को रोकना है।