What is EPFO (EMPLOYEES PROVIDEN FUND) ?

Employees’ Provident Fund (EPF) भारत में कर्मचारियों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जो Employees’ Provident Fund and Miscellaneous Provisions Act, 1952 के तहत लागू की गई है। यह योजना कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई गई है। इसके तहत कर्मचारी और नियोक्ता दोनों एक निश्चित राशि EPF खाते में जमा करते हैं, जो सेवानिवृत्ति या नौकरी छोड़ने पर कर्मचारी को मिलती है।


EPF Act कब लागू हुआ?

EPF Act 4 मार्च 1952 को लागू हुआ था। यह अधिनियम संगठित क्षेत्र (Organized Sector) में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए लागू होता है।


EPF किन पर लागू होता है?

EPF निम्नलिखित शर्तों वाले संगठनों पर लागू होता है:

  1. जिन संगठनों में 20 या अधिक कर्मचारी काम करते हैं।
  2. कुछ विशेष परिस्थितियों में, 20 से कम कर्मचारियों वाले संगठन भी EPF योजना में शामिल हो सकते हैं।

योगदान दर (Contribution Rate)

EPF में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान होता है। वर्तमान में योगदान दर निम्नलिखित है:

  1. कर्मचारी का योगदान (Employee Contribution):
  • कर्मचारी अपने मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ता (DA) का 12% EPF खाते में जमा करता है।
  1. नियोक्ता का योगदान (Employer Contribution):
  • नियोक्ता भी कर्मचारी के मूल वेतन और DA का 12% योगदान करता है।
  • इसमें से 8.33% Employees’ Pension Scheme (EPS) में जाता है और 3.67% EPF खाते में जमा होता है।
  • इसके अलावा, नियोक्ता 0.50% EPF प्रशासनिक शुल्क और 0.50% EDLI (Employees’ Deposit Linked Insurance) योजना के लिए भी योगदान करता है।

योगदान की अधिकतम सीमा

  • मूल वेतन और DA: EPF योगदान की गणना के लिए मूल वेतन और DA की अधिकतम सीमा ₹15,000 प्रति माह है। हालांकि, यदि कर्मचारी का वेतन ₹15,000 से अधिक है, तो वह स्वेच्छा से अधिक योगदान कर सकता है (Voluntary Provident Fund – VPF)।
  • EPS के लिए: नियोक्ता का 8.33% योगदान केवल ₹15,000 तक के वेतन पर ही लागू होता है।

EPF के लाभ

  1. सेवानिवृत्ति पर कोष: सेवानिवृत्ति या नौकरी छोड़ने पर कर्मचारी को EPF खाते में जमा राशि मिलती है।
  2. पेंशन योजना (EPS): EPS के तहत कर्मचारी को मासिक पेंशन मिलती है।
  3. बीमा कवर (EDLI): कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को बीमा राशि मिलती है।
  4. टैक्स लाभ: EPF पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है।

EPF निकासी के नियम

  1. सेवानिवृत्ति: 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर पूरी राशि निकाली जा सकती है।
  2. नौकरी छोड़ने पर: यदि कर्मचारी 2 महीने से अधिक समय तक बेरोजगार रहता है, तो वह EPF निकाल सकता है।
  3. आपातकालीन निकासी: चिकित्सा आपातकाल, शादी, शिक्षा आदि के लिए आंशिक निकासी की जा सकती है।

EPF पासबुक और खाता प्रबंधन

कर्मचारी EPFO की वेबसाइट या UMANG ऐप के माध्यम से अपने EPF खाते की जानकारी और पासबुक देख सकते हैं।


नोट: EPF योजना कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित और लाभदायक बचत विकल्प है, जो उन्हें भविष्य में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।

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